गांव के देसी चाचा का देसी लंड


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मेरा नाम सविता है, मैं मुंबई की एक बड़ी ही मस्त और जवानी से भरपूर 32 वर्ष की महिला हू। मेरे यौवन को देखते हुए ही मेरे पति ने मुझसे शादी की, वह मेरे यौवन का हर रात को मजा लेते हैं परंतु उनकी इच्छा अभी तक नहीं भरी है। हमारी शादी को 3 वर्ष हो चुके हैं लेकिन उसके बाद भी मेरे पति हर रात को अपने सख्त लंड पर सरसों का तेल लगाते हुए मुझे चोदते हैं। वह मुझे कहते हैं तुम्हारा चूत मार कर मेरी सारी थकान दूर हो जाती है। एक दिन रात को उन्होंने मुझे तीन बार चोदा। जब मैं उनकी बाहों में थी तो उन्होंने मुझे कहा कि हम लोग कुछ दिनों के लिए गांव जाएंगे और गांव में ही हम लोग एक महीने तक रहने वाले हैं। मैं बहुत खुश थी कि गांव में सब लोग कैसे रहते होंगे मेरे अंदर बहुत ही उत्सुकता थी क्योंकि मैंने आज तक कभी भी गांव का माहौल नहीं देखा था। जब हम लोग गांव गए तो मुझे गांव में बड़े बडे खेत देखकर बड़ा ही अच्छा लग रहा था।

मैं अपने पति के हाथ को पकड़ते हुए कह रही थी गांव में कितने बड़े बड़े खेत हैं और मुंबई में तो पैर रखने की भी जगह नहीं है गांव में सब लोग कितने तंदुरुस्त हैं। मेरे पति कहने लगे गांव में सब लोग मेहनत करते हैं इसीलिए सब लोग तंदुरुस्त है और शहर में तो सिर्फ पैसे के पीछे ही भागते हैं। जब मैं अपने पति के चाचा से मिली तो उनकी लंबाई 6 फुट से ऊपर है उनका नाम बिट्टू है सब लोगों उन्हें बिट्टू चाचा कहकर ही बुलाते हैं इसलिए मैं भी उन्हें बिट्टू चाचा कह कर बुलाने लगी। जब मैं पहली बार  बिट्टू चाचा से मिली तो मैंने सोच लिया था कि मैं बिट्टू चाचा से ही अपनी चूत मरवा कर रहा हूं। जिस हिसाब से उनकी लंबाई है उनका  लंड भी उतना ही बड़ा होगा।  इतनी उम्र होने के बावजूद भी उनके चेहरे पर निखार है वह बिल्कुल भी नहीं लगते कि उनकी उम्र 60 वर्ष की हो चुकी है। वह गांव में कई महिलाओं के यौवन का रसपान करते हैं। मैंने एक दिन उन्हें देख लिया था वह घर की छत में ही बगल की चाची को चोद रहे थे लेकिन मैं उनसे पर्दा करती हूं इसलिए मैं उनसे यह बात नहीं कर पाई। मुझे भी गांव का माहौल बहुत अच्छा लग रहा था, मैं अपने पति के साथ गांव के बड़े बडे खेतो मे जा रही थी। एक दिन हम सब लोग बैठे हुए थे और खाना खा रहे थे बिट्टू चाचा कहने लगे तुम्हारी जोड़ी बहुत ही अच्छी है।

वह मुझसे पूछने लगे कि सविता तुम्हें गांव में कैसा लग रहा है। मैंने उन्हें कहा गांव मुझे बहुत ही पसंद है मैंने आज तक कभी भी गांव नहीं देखा लेकिन मुझे गांव में ही रहने का बड़ा मन है। बिट्टू चाचा कहने लगे तो तुम गांव में ही रहो क्यों तुम शहर में रह रहे हो। मेरे पति ने कहा कि गांव में अब हमसे खेती बाड़ी का काम नहीं हो पाएगा इसलिए हम लोग शहर में रह रहे हैं यदि मैं खेती बाड़ी का काम कर पाता तो जरूर गांव में रहता यह बात मेरे पति ने बिट्टू चाचा से कही। बिट्टू चाचा ने कहा कि गांव में सब कुछ बहुत ही शुद्ध है हम लोग इतना देसी घी खाते हैं कि हमारे अंदर बहुत ही ताकत है। मैंने  बिट्टू चाचा से पूछा कि क्या आपके अंदर बहुत ज्यादा ताकत है। चाचा ने कहा आज भी मैं किसी नौजवान को टक्कर दे सकता हूं। जब यह बात मैंने बिट्टू चाचा के मुंह से सुनी तो मेरी चूत का पानी निकलने लगा था और मैं उनकी तरफ मोहित होने लगी थी। मुझे ऐसा मौका नहीं मिल पा रहा था जब मैं चाचा को अपने स्तन दिखा पाती और मै चाचा क लंड का मजा ले पाती। एक दिन में बाथरूम से बाहर आ रही थी तो बिट्टू चाचा बाहर शराब पी कर लेटे हुए थे मैंने जब उनके लंड को देखा तो मैंने उनके लंड पर अपने हाथ को रख दिया था उनका लंड खड़ा हो गया लेकिन तब तक मेरे पति आ चुके थे इसलिए मैं अपने पति के साथ सोने के लिए चली गई। बिट्टू चाचा भी मेरे इशारे समझ चुके थे वह यह बात जान चुके थे कि मुझे भी उनके लंड को अपनी चूत मे लेना है लेकिन हम दोनों को ही मौका नहीं मिल पा रहा था। एक दिन हम तीनो लोग साथ में बैठे हुए थे उस दिन मैंने उनसे पूछा कि चाची का देहांत कब हुआ। चाचा कहने लगे मेरी पत्नी के देहांत तो काफी समय पहले ही हो चुका है तब से मैं अकेला ही हूं। गांव में उनके बच्चे ही उनके साथ रहते हैं और वही सारा काम संभालते हैं।

बिट्टू चाचा भी मेरे गदराए बदन को बडे तांड कर देखा करते और हमेशा ही कहते सविता तुम तो बडी ही सुंदर हो। मेरे पति को उनकी यह बात समझ नहीं आती थी जब वह मेरी सुंदरता की तारीफ करते थे लेकिन मैं उनकी बातों को समझ लेती थी। एक दिन मेरे पति खेत में चले गए और उस दिन मैं घर पर खाना बना रही थी। उस दिन  बिट्टू चाचा ने मुझे पीछे से आकर पकड़ लिया और उनका लंड मेरी गांड से टकराने लगा। मैंने भी चाचा को अपने स्तन दिखा कर अपनी तरफ  आकर्षित कर लिया। उन्होंने जब मेरे स्तन देखे तो चाचा कहने लगे तुम्हारे स्तन तो बड़े ही सुडौल हैं। चाचा ने जब मेरे स्तनों का रसपान किया तो चाचा के लंड से पानी छुटने लगा था उन्होंने मुझसे कहा कि अब तो  तुम्हारे यौवन का रसपान मुझे करना ही पड़ेगा देखना पड़ेगा  तुम्हारी चूत कितनी टाइट है। मैंने भी चाचा का सम्मान करते हुए उनके सामने अपने सारे कपड़े खोल दिए मै अपने अंतर्वस्त्र मैं चाचा के सामने थी। जब उन्होंने मेरे अंतर्वस्त्रों को अपने हाथों से खोला तो मेरा पानी निकलने लगा था। चाचा ने कहा आज तुम्हारी योनि का पानी में पीना चाहता हूं और तुम्हारी योनि का रसपान में करना चाहता हूं। जब चाचा ने मेरी मुलायम योनि का पानी पिया तो वह मुझे कहने लगे मुझे तो आज बड़ा स्वाद महसूस हो रहा है।

मेरी योनि का जितना भी गिला पदार्थ था उन्होंने अपने मुंह के अंदर ले लिया था और वह अब पूरे उत्तेजना में थे। जब मैंने चाचा को अपनी गांड दिखाई तो उन्होंने मेरी गांड पर अपने दांत के निशान मार दिए थे वह कह रहे थे तुम्हारे गांड बड़ी ही मस्त है। तुम किसी हुस्न की परी से कम नहीं हो जब चाचा ने मेरे गांड की लकीरों के बीच में अपने कडक लंड को रगडा तो मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया था। चाचा ने भी अपनी उंगली को पूरा मेरी नाजुक चूत मे डाल दिया था चाचा की उंगली भी कम मोटी नहीं थी इसलिए मुझे बड़ा दर्द हुआ था। जब चाचा का मोटा और कड़क लंड मेरी योनि में गया तो मैं बहुत चिल्लाने लगी थी मुझसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था। मैंने चाचा से कहा था कि आप अपने लंड को बड़े आराम से डालिए लेकिन उन्होंने तो एक ही झटके में मेरी चूत को फाड़ कर रख दिया बड़ी तेजी से मुझे झटके मारे। मुझे उनका कडक लंड लेने में बड़ा मजा आया और उन्होंने मेरी इच्छा को शांत कर दिया। उसके बाद मैं उनकी दीवानी हो गई और मैंने फैसला कर लिया था कि मैं गांव में ही रहूंगी लेकिन मेरे पति मुझसे जिद करने लगे की तुम मुंबई में ही रहो। जब कभी भी तुम्हारा मन हुआ करे तो तुम गांव आ जाया करो इसीलिए मैंने भी सोच लिया कि चलो अब मैं मुंबई से गांव भी आती रहूंगी और चाचा से भी मजे लेती रहूगी। चाचा का कडक लंड जैसा ही मेरी चूत में गया था तो मुझे बड़ा ही अच्छा महसूस हुआ था। अब हम लोग शहर लौट आए थे लेकिन मैं चाचा को हमेशा याद करती थी और चाचा भी मुझे कभी कबार अपने फोन से फोन कर दिया करते थे वह कहते बहू गांव कब आ रही हो मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं। मैं चाचा से कहती बस कुछ दिनों बाद ही मैं गांव आ रही हूं, मैं भी आप का बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रही हूं। मुझे भी बिट्टू चाचा की बड़ी याद आती है और हमेशा में उनके बारे में सोचती हूं मेरे दिलो दिमाग में सिर्फ बिट्टू चाचा ही बस चुके हैं। मेरे दिमाग में और कुछ नहीं चलता यह बात मेरे पति को नहीं पता लेकिन जिस प्रकार से बिट्टू चाचा ने मेरे यौवन का रसपान किया था। मेरी इच्छा आज तक वैसे किसी ने भी पूरी नहीं की मेरे पति हमेशा ही मुझे चोदते हैं लेकिन उसके बावजूद भी मैं हमेशा ही बिट्टू चाचा की कल्पना करती हूं।